"दहेज प्रथा बना एक अभिशाप"
दहेज नामक विख्यात कुप्रथा से आज हमारा पूरा देश उत्पीड़न का शिकार बना हुआ हैं।
वर्तमान समय में दहेज प्रथा का प्रचलन चरम सीमा पर हैं। दहेज प्रथा
सामाजिक समस्या के रूप में उभरकर आज हमारे सामने हैं। तथा इसका सबसे अधिक प्रभाव
गरीब वर्ग के लोगों को झेलना पड़ता है। दहेज प्रथा के बढ़ते प्रचलन ने
महिलाओं के लिए संघर्ष व अत्याचार जैसी अनेक परेशानियों खड़ी कर दी, जिसके चलते महिलाओं व उनके परिवार को
आत्महत्या जैसे तरिकों को अपनाना पड़ता हैं। तथा महिला के ससुराल पक्ष द्वारा अनेक अत्याचार व अपमानित घटनाओं का सामना करना पड़ता हैं। जो हमारे लिए अत्यंंत दुुःख की बात हैं।
आइये हम देखते हैं आखिर इसके लिए हमारे देश ने क्या अहम कदम उठाए ?? और कहाँ तक सफल हुए??
दहेज प्रथा को रोकनेे के लिए सरकार ने अनेक कदम उठाए, अधिनियम लागू किए। जिनके तहत दहेज प्रथा पर कानूनी रोक लगा दी गई।
- दहेज निषेध अधिनियम के तहत 5 वर्ष का कारावास या 15,000 रूपये का प्रावधान ।।
- धारा 498
इन सब उपायो के बाद भी आज दहेज प्रथा का प्रचलन दिनोंदिन बढ़ ही रहा हैं। जहाँ एक तरफ लोग शिक्षित समाज का विकास कर रहे हैं, वहीं दुसरी ओर दहेज जैसी कुप्रथा का ।।।
पूर्ण रूप से दहेज प्रथा का खात्मा हैं संभव
जानिए आखिर कैसे ??
हमारा देश दहेज प्रथा जैसी सामाजिक समस्या से आज भी पूरी तरह से उभर नहीं पा रहा, परन्तु इस समस्या का अब एक मात्र समाधान हैं - आध्यात्मिक जागृृृति।
पूर्ण सतगुरु से उपदेश लेकर शास्त्रानुकूल सत् भक्ति करने तथा आध्यात्मिक दृष्टिकोण को समझकर हम इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
उदाहरण - आज पूरे विश्व में केवल
संत रामपाल जी महाराज केे अनुयायी ही इस कुप्रथा से दूर हैं।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा समाज सुधार का उद्देश्य।।
इस उद्देश्य के चलते संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में लाखों दहेज मुक्त विवाह हुए सम्पन्न।।