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Wednesday, May 13, 2020

नैतिक संस्कारों का आधुनिक पतन

वर्तमान समय में हुआ युवा पीढ़ी में संस्कारों का तेजी से पतन 
                बात है संस्कार विहीन समाज की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण आज युवा पीढ़ी में भी हमारे नैतिक संस्कारों का हो रहा है तेजी से हनन। वर्तमान की युवा पीढ़ी में हमारे संस्कारों का कोई मूल्य शेष नहीं रह गया है। हमारा सभ्य समाज दिनोंदिन असभ्यता की श्रेणी में विलिन होकर, हमारे नैतिक संस्कारों को भूलकर आधुनिक चकाचौंध में विलमान हो गया हैं। 
                                                 आज युवा पीढ़ी से लेकर हमारी संस्कृति के मायने भी जैसे कहीं खो से गये हो। 
               वर्तमान में असभ्यता, अनैतिकता, अशिष्टता, दुर्व्यवहार , दुराचार, बेशर्मी, जैसे असामाजिक तत्वों का विकास हो रहा हैं। 
(हमारे विकसित व आधुनिक देश ने हमारे संस्कारों कि रक्षा के लिए कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाए। )

आईये अब जानते हैं हमारे नैतिक संस्कारों की रक्षा व सभ्य समाज के विकास का एकमात्र उपाय  :-

जहाँ एक तरफ हमारे समाज की युवा पीढ़ी में असभ्यता, अशिष्टता, नशे के आदि, अश्लीलता कि ओर अग्रसर व अन्य कई बुराईयों से परिपूर्ण हो रहे हैं, वहीं दुसरी ओर हमारी संस्कृति का वापस आगमन हो रहा हैं, हमारा समाज, हमारी युवा पीढ़ी में सभ्यता, शिष्टाचार का विकास हो रहा हैं। 
                         ऐसा केवल संत रामपाल जी महाराज के अनुयायीयों में ही देखने को नजर आया। क्योंकि संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य यही हैं - सभ्यता का विकास, नशा मुक्त, आपसी भाईचारा व सभी बुराईयों से देश को मुक्त करना। 
                                          तथा सभी को आध्यात्मिक ज्ञान से परिपूर्ण कर सभी प्रकार के असामाजिक तत्वों को समाप्त करना। 
आईयेे एक बार अवश्य विचार करेें।




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