Saturday, May 30, 2020

कबीर साहिब के मगहर लीला

मगहर में भाईचारे की मिसाल!
 हिन्दू व मुसलमानों के बीच धार्मिक सामंजस्य और भाईचारे की जो विरासत कबीर परमात्मा छोड़कर गए हैं उसे मगहर में आज भी जीवंत रूप में देखा जा सकता है।
 मगहर में जहाँ कबीर परमेश्वर जी सशरीर सतलोक गए थे, वहां हिंदू-मुसलमानों के मंदिर और मजार 100-100 फुट की दूरी पर बने हुए हैं।
 "कबीर, विहंसी कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
 हिन्दू तुरक नहीं हो, ऐसा वचन हमार।"

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