अविनाशी परमात्मा कौन है?
गीता ज्ञान दाता 'काल ब्रह्म' हैं जो विनाशी प्रभु हैं अर्थात् काल प्रभु भी जन्म व मृत्यु को प्राप्त होता है।
- श्रीमदभगवद्गीता में तीन पुरुष की व्याख्या की गई हैं :-
प्रथम पुरुष - क्षर पुरुष,
द्वितीय पुरुष - अक्षर पुरुष,
तृतीय पुरुष - परम अक्षर पुरुष,
क्षर पुरुष तथा अक्षर पुरुष (प्रभु) विनाशी अर्थात् इनकी जन्म - मृत्यु होती हैं। तथा अविनाशी परमात्मा, पूर्ण ब्रह्म, सर्वशक्तिमान परमात्मा, समर्थ प्रभु केवल परम अक्षर पुरुष (प्रभु) हैं जिनकी कभी जन्म - मृत्यु नहीं होती।
काल ब्रह्म भी अविनाशी परमात्मा से ही उत्पन्न हुआ हैं।
अविनाशी परमात्मा कबीर परमेश्वर है जो हर युग में अपनी लीला अनुसार धरती पर अवतरित होते हैं तथा अपनी लीला अनुसार कमल के पुष्प पर प्रकट होते हैं।
कबीर परमेश्वर ही पूर्ण परमात्मा हैं जो जन्म मरण से परे हैं।
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